इस वर्ष मानसून के दौरान साहसिक पर्यटक केवल ‘सिया प्वाइंट’ देखने के लिए लोहागढ़ पहुंच रहे हैं। इस घटना के कारण लोहागढ़ की बदनामी हो रही है और ‘सिया प्वाइंट’ नाम इंटरनेट पर एक लोकेशन के रूप में भी प्रसिद्ध हो गया है। इससे लोहागढ़ जैसे ऐतिहासिक किले और विश्व धरोहर स्थल की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच रहा है। इसे देखते हुए अखिल महाराष्ट्र गिर्यारोहण महासंघ ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप करने की मांग की है।
महाराष्ट्र के पुणे जिले में लोहागढ़ किला (लौह किला) लोनावला से लगभग 12 किमी और पुणे से 52 किमी उत्तर-पश्चिम में स्थित है। समुद्र तल से 1,033 मीटर (3, 389 फुट) की ऊंचाई पर बना यह ऐतिहासिक Iron Fort मानसून में ट्रैकिंग के लिए बेहद लोकप्रिय है।
इसका निर्माण 10-11वीं शताब्दी में लोहतमिया वंश या लोहटमिया वंश के समय हुआ था। इस किले पर चालुक्य, राष्ट्रकूट, यादव, बहमनी, निजाम, मुगल और मराठा शासकों का भी अधिकार रहा। छत्रपति शिवाजी महाराज ने 1648 ईस्वी में इसे अपने कब्जे में ले लिया था। इस महाराष्ट्र के प्रमुख किले में चार मजबूत दरवाजे (गणेश, नारायण, हनुमान और महाद्वार) और बिच्छू के डंक जैसी दिखने वाली ‘विंचू काटा’ नामक पहाड़ी रिज मौजूद है।
लोहागढ़ फोर्ट ट्रेक प्रतिदिन सुबह ९:00 बजे से शाम ६:00 बजे तक खुला रहता है। भारतीय नागरिकों के लिए 25 रुपये और विदेशी नागरिकों के लिए 300 रुपये है।
पुणे के जाने-माने रियल एस्टेट कारोबारी के बेटे केतन अग्रवाल (26) की शादी आगामी नवंबर महीने में सिया गोयल (20) नाम की युवती से होने वाली थी। सिया गोयल अपने प्रेमी चेतन चौधरी (22) के साथ रहना चाहती थी। केतन अग्रवाल को रास्ते से हटाने के लिए सिया गोयल और चेतन चौधरी ने 18 जून 2026 को लोहागढ़ किले के एक टीले से केतन अग्रवाल को 400 फीट गहरी खाई में ढकेलकर उसकी हत्या कर दी।
हैरान करने वाली बात यह है कि सैलानी यहां किसी प्राकृतिक सौंदर्य को देखने नहीं, केतन ‘अग्रवाल हत्याकांड’ के उस खौफनाक मुहाने को देखने पहुंच रहे हैं, जहां से उसे नीचे धकेला गया था। इंटरनेट मीडिया पर लोग इस टीले को अब ‘सिया प्वाइंट’ कहने लगे हैं।
अखिल महाराष्ट्र गिर्यारोहण महासंघ ने कहा है कि लोहागढ़ की घटना के दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन इस घटना के बाद डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लोहागढ़ की जिस तरह बदनामी की जा रही है, वह महाराष्ट्र की ऐतिहासिक विरासत के लिए खतरे की घंटी है। इस संबंध में मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस को विस्तृत पत्र भी लिखा है।
पत्र में कहा गया है कि लोहागढ़ केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के दुर्ग वैभव की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर है। ऐसे किले की पहचान किसी आपराधिक घटना से जोड़ना, उसे नया नाम देना या उस पर मजाक, मीम्स, रील्स और सनसनीखेज सामग्री प्रसारित करना इतिहास और समाज की भावनाओं का अपमान है। पिछले कुछ दिनों से लोहागढ़ की एक चट्टान को सोशल मीडिया और कुछ डिजिटल माध्यमों में ‘सिया प्वाइंट’ कहा जा रहा है। यहां तक कि गूगल मैप्स पर भी इस तरह के उल्लेख दिखाई दे रहे हैं। इसके चलते केवल जिज्ञासा के कारण बड़ी संख्या में लोग वहां पहुंच रहे हैं।
महासंघ ने कहा कि ऐतिहासिक गढ़-किले राष्ट्रीय अस्मिता के प्रतीक हैं। उनकी पहचान इतिहास से होनी चाहिए, न कि आपराधिक घटनाओं से। इसलिए सरकार को डिजिटल माध्यमों में ऐतिहासिक स्थलों की बदनामी करने वाले गलत नामकरण, भ्रामक सामग्री और सनसनीखेज प्रचार पर रोक लगाने के लिए अलग नीति बनानी चाहिए। साथ ही महाराष्ट्र के गढ़-किलों को भी संवेदनशील संरक्षण प्रदान किया जाना आवश्यक है।
महासंघ ने यह भी मांग की है कि व्यावसायिक प्री-वेडिंग शूट, फैशन शूट, विज्ञापन और सोशल मीडिया कंटेंट निर्माण के लिए स्पष्ट नीति, पूर्व अनुमति, आचार संहिता तथा नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया जाए। साथ ही गढ़-किलों के सम्मान और उनकी पवित्रता की रक्षा के लिए राज्य स्तर पर दीर्घकालिक नीति बनाई जाए।
